बिहार: दादा करते थे बूट पॉलिश और पोती ने डाक्टर बनकर मिशाल कायम किया: फर्श से अर्श तक

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बिहार के एक गरीब किसान परिवार में जन्मी एकलौती बेटी ने अपने परिवार और जिले का सर उस वक्त़ और भी गर्व से ऊंचा कर दिया जब उसने डाक्टर की पढ़ाई पूरी की | हालांकि इनका परिवार संघर्ष और आर्थिक तंगी से हमेशा घिरा रहा। इनके दादा बूट पॉलिस करते थे और इनके पिता ने स्नातक तो कर लिया था मगर उस वक्त़ नौकरी के आभाव में शुरुआती दौर में किसान के रुप में अपने परिवार का पालन पोषण करने पर मजबूर थे।

मां का कम पढ़ा लिखा होना भी कहीं न कहीं एक चुनौती था अपनी बेटी को साक्षर बना पाना पर बेटी को एक मुकाम तक पहुँचाने कि प्रबल इच्छा ने वो कर दिखाया जो सबके लिए एक प्रेरणा हैं, पिता ने खेती करके दिन रात मेहनत करके परिवार का पालन पोषण किया और बेटी के सपनो को अंजाम दिया।

बिहार के एक गरीब किसान परिवार में जन्मी एकलौती बेटी ने अपने परिवार और जिले का सर उस वक्त़ और भी गर्व से ऊंचा कर दिया जब उसने डाक्टर की पढ़ाई पूरी की | हालांकि इनका परिवार संघर्ष और आर्थिक तंगी से हमेशा घिरा रहा। इनके दादा बूट पॉलिस करते थे और इनके पिता ने स्नातक तो कर लिया था मगर उस वक्त़ नौकरी के आभाव में शुरुआती दौर में किसान के रुप में अपने परिवार का पालन पोषण करने पर मजबूर थे।

मां का कम पढ़ा लिखा होना भी कहीं न कहीं एक चुनौती था अपनी बेटी को साक्षर बना पाना पर बेटी को एक मुकाम तक पहुँचाने कि प्रबल इच्छा ने वो कर दिखाया जो सबके लिए एक प्रेरणा हैं, पिता ने खेती करके दिन रात मेहनत करके परिवार का पालन पोषण किया और बेटी के सपनो को अंजाम दिया।

डाक्टर कुमारी मंजू (Doctor Kumari Manju) जिनका जन्म बिहार के गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड के एक अति पिछड़े गांव बनकटा में हुआ है। बेटी की प्रारंभिक शिक्षा को पूरी कराने के लिए किसान पिता को साइकिल से 8 किलोमीटर की दूरी तय कर के बेटी को ले जाना और ले आना पड़ता था।

उस जमाने में संसाधन के नाम पर ना तो पक्की सड़क थी और ना ही बिजली की व्यवस्था, यहां तक कि उस समय उचित सवारी की भी व्यवस्था नही थी। लालटेन की रौशनी में इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। ये वक्त इतना बुरा था कि कोई भी बाप अपनी बेटी को घर से बाहर निकलने नहीं देना चाहता था किंतु मंजू के हौसले और जज़्बे की बात ही कुछ और थी। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार और मेधावी होने के कारण दसवीं की पढ़ाई अच्छे नंबरों से पास करने के बाद आगे की तैयारी के लिए पटना चली गई हैं!

पटना के बी एन कालेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पूरी हुई। हालांकि लड़की होने की वज़ह से पटना में भी इन्हें काफी समस्याओं को झेलना पड़ा और इनकी जिंदगी बहुत संघर्षपूर्ण रहा। आर्थिक कमजोरी होने के कारण पटना में रोजाना अपने साइकिल चलाकर 20 किलोमीटर की दूरी तय करके अपनी मेडिकल की तैयारी करती थी।

जिस गरीबी की हालातों से इनका परिवार उस समय गुजर रहा था उस समय मेडिकल की महंगी किताबें खरिदने की बजाए अपनी सहेलियों से मांग कर इन्हें काम चलाना पड़ता था! उनके पिता पर उनकी पढ़ाई का ज्यादा बोझ न पड़े जिसके लिए उन्होंने कुछ बच्चियों को पटना में ही होम ट्युशन देना शुरु कर दिया था!

जिंदगी के कई उतार चढ़ाव को देखते कुमारी मंजू ( Doctor Kumari Manju) नालंदा मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल से अपनी एम बी बी एस की पढ़ाई पूरी करने के बाद बिहार के नंबर वन मेडिकल कालेज पी एम सी एच से एम एस की भी पढ़ाई पूरी कर के आज एक सफल चिकित्सक के रुप में समाज को अपनी सेवा दे रही हैं।

चपन से ही गरीबी को महसूस करने वाली डाक्टर मंजू (Doctor Kumari Manju) आज अपने प्रैक्टिस के साथ साथ अपनी हर खुशी को गरीब बच्चों के साथ साझा करती हैं | जन्मदिन हो या फिर कोई भी उत्सव का मौका गरीब दलित समाज में मिठाईयाँ,एज्युकेशनल किट, कपड़े या फिर मुफ्त मेडिकल कैंप लगाकर लोगों के साथ हमेशा जुड़ी रहती हैं।

डाक्टर मंजू अपने माता-पिता को अपनी इस सफलता का श्रेय देती हैं। साथ ही आप एक प्रेरणा हैं उनके लिए जो अपने सपनों को साकार करना चाहते है , बस जरूरत है एक न मिटने वाले जूनून की ।


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