पूरे राज्य की पुलिस लगी थी विकास के पीछे और महादेव बनकर दरभंगा में रह रहा था सोना लूटकांड का सरगना

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शहर के बड़ा बाजार स्थित आभूषण की थोक दुकान अलंकार ज्वेलर्स से 9 दिसंबर को हुई करोड़ों के सोना लूट के बाद चल रही पुलिस कार्रवाई में सोना लूटनेवाले गिरोहों की हकीकत परत दर परत सामने आ रही है। दरभंगा नहीं पूरे उत्तर बिहार में हुए सोना लूटकांडों में लिप्त रहे विकास झा की गिरफ्तारी के बाद कई नए तथ्य सामने आए हैं। विकास को पूरे राज्य की पुलिस खोज रही थी और वह दरभंगा के मनीगाछ़ी स्थित माउबेहट गांव में अपना ठिकाना बनाकर रह रहा था। मौसेरे भाई संजय मिश्रा के गांव में उसे कोई नाम से नहीं जाने इस कारण विकास झा ने अपना नाम तक बदल लिया था। वह माउबेहट गांव में महादेव के नाम से जाना जाता था। लेकिन, यह महादेव इतना शातिर है इससे ग्रामीण अनजान है।

पूरे राज्‍य में सोना लूटकांड का सरगना व‍िकास झा (फाइल फोटो)
पूरे राज्‍य में सोना लूटकांड का सरगना व‍िकास झा (फाइल फोटो)

समस्तीपुर जिले के शाहपुर पगड़ा निवासी विकास को जब मुंगेर के संग्रामपुर से गिरफ्तार किया गया तो पूछताछ में उसने अपना गुनाह ही नहीं कबूल किया बल्कि, अपने धंधे सहित दरभंगा जिले के तमाम ठिकानों की जानकारी भी दी। इसके बाद पुलिस ने सबसे पहले माउबेहट गांव में छापेमारी की। जहां से विकास के मौसेरे भाई संजय मिश्रा को गिरफ्तार किया गया। अगले ही दिन यह बात आग की तरह फैल गई। लोग कहने लगे महादेव ही विकास झा है। गाय की तरह रहता था। महादेव इतना बड़ा अपराधी है जिसे पूरे बिहार की पुलिस खोज रही है, यह उसके आचरण से कभी लगा ही नहीं । गांव वालों का कहना है कि अगर यह मालूम होता की महादेव ही विकास है तो इसकी जानकारी पुलिस को जरूर देते ।

गांव के युवकों को करता रहा गुमराह

विकाश झा काफी शातिर अपराधियों में शामिल है। वैशाली और मुजफ्फरपुर में 90 किलो सोना लूटकांड के आरोपित विकास पर दरभंगा में भी करोड़ों के आभूषण लूटने का आरोप लगा है। उसके पास रुपये की कोई कमी नहीं है। अपने मौसेरे भाई के गांव माउबेहट में दर्जनों युवकों के बीच बेशुमार रुपये खर्च करने लगा। इसमें कई युवकों को उसने नशे की लत लगाई। इसके बाद अपने फायदे के लिए इस्तेमाल भी किया। यही कारण है कि विकास के मौसेरे भाई संजय मिश्रा के साथ गांव के आलोक कुमार झा, अविनाश मिश्रा और मुकुंद झा भी पुलिस हत्थे चढ़ गए। जबकि, पास के गांव के सोनार रोशन साह को गिरफ्तार कर लिया गया। रोशन ने 22 लाख रुपये देकर विकास से एक किलो सोना खरीदा था।

शराब तस्करी के धंधे में लगा रखे हैं लाखों रुपये

विकास झा दरभंगा में रहकर शराब का नेटवर्क चलाता था। इसमें उसने लाखों रुपये निवेश कर रखा है। इस पूरे नेटवर्क का संचालन अपने मौसेरे भाई संजय मिश्रा के साथ करता था। विकास की गिरफ्तारी के बाद यह जानकारी पुलिस को मिली है। हाल के दिनों में उस क्षेत्र से शराब से भरे ट्रक और पिकअप वैन की बरामदगी तक पुलिस को यह जानकारी नहीं मिल पाई इस शराब के नेटवर्क कौन-कौन शामिल है। लेकिन, अब इसका धीरे-धीरे खुलासा होने लगा है। बताया जाता है कि माउबेहट के दर्जनों युवकों को शराब की दलदल में विकास ने ढकेल दिया। पुलिस सूत्रों की माने तो पकड़े जाने के डर से विकास कुछ-कुछ दिनाें पर अपना ठिकाना बदल रहा था। कभी वह दरभंगा शहर के कादिराबाद में रहता था तो कभी चुनभट्टी वाले किराए के मकान में।

इस दौरान माउबेहट में शराब और गांजा का कारोबार चलाने के लिए वह अपने बेगूसराय के एक शार्गिद रखा था। जबकि, एकमी-शोभन बाइपास में संचालित न्यू मिथिला रेस्टूरेंट को चलाने के लिए अपने ग्रामीण आशुतोष झा उर्फ महाराज को रखा था। मुंगेर के संग्रामपुर में संचालित ईंट भट्टा विकास खुद देख रहा था। शराब कारोबार में गोलू नामक युवक सहित मुकुंद, चंदन, अमन, विपिन और मन्ना की खोज तेज कर दी गई है। इसमें मुकुंद को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने विकास के तमाम ठिकानों को चिन्हित कर लिया है। समय रहते त्वरित कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।


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Vikash Mishra

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