कोरोना निगेटिव को पॉजिटिव बता 17 दिन रखा अस्‍पताल में भर्ती, ऐसेे खुला मामला

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लूज मोशन की शिकायत लेकर गोरखपुर जिला अस्पताल पहुंचे एक मरीज को कोरोना संक्रमित बताकर 17 दिन तक बीआरडी के कोरोना वार्ड में भर्ती रखा। जबकि जिला अस्पताल के पैथालॉजी विंग द्वारा 29 जून को जारी रिपोर्ट में वह निगेटिव है।

17 दिन के बाद जिंदगी और मौत से जद्दोजहद कर घर वापस आए बेतियाहाता के सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि 22 जून को उन्हें लूज मोशन की शिकायत हुई तो वह एक निजी अस्पताल इलाज के लिए पहुंचे। वहां जाने के बाद चिकित्सक ने पहले कोरोना जांच कराने के लिए कहा। थोड़ा आराम हो जाने से वह घर वापस आ गए। बाद में फिर लूज मोशन की दिक्कत हुई तो वह जिला अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने बताया कि वह 28 जून को जिला अस्पताल में भर्ती हो गए। 28 की शाम को ही वहां के टेक्नीशियन ने पत्नी, बच्चों के साथ ही मेरा भी सैंपल लिया। इसके बाद एक चिकित्सक ने 29 जून की शाम को कहा कि आप कोरोना पॉजिटिव हैं। घर से कपड़ा मंगा लीजिए। पत्नी और बच्चे निगेटिव हैं, उन्हें घर भेज दीजिए। बकौल सुनील यह सुनकर वह घबरा गया। 30 जून को एक एम्बुलेंस आई और उसमें उसके साथ दो अन्य कोरोना मरीजों को बैठाया। दो अन्य को रेलवे अस्पताल छोड़ा और उसे बीआरडी लेकर चले गए।

दो दिन बाद बिगड़ने लगी तबीयत
सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि उन्हें वार्ड नम्बर तीन के बेड नम्बर 10 पर भर्ती कर दिया गया। अगल-बगल भी कोरोना के मरीज थे। दो दिन बाद से तबीयत बिगड़ने लगी। इसकी वजह से आईसीयू में भेज दिया गया। तीन दिन वेंटीलेटर पर भी रहा। इस दौरान एक बार भी कोरोना जांच नहीं हुई। 12 जुलाई को एक बार सैंपल लिया गया लेकिन रिपोर्ट बताया ही नहीं। पूछता रह गया लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया। 17 जुलाई को टेस्ट कराया और चिकित्सक ने बताया कि उनकी रिपोर्ट निगेटिव है, अब घर जा सकते हैं।

जिला अस्पताल से मिली रिपोर्ट तो सहम गया : सुनील कुमार गुप्ता के पुत्र प्रांजल गुप्ता ने 13 जुलाई को जिला अस्पताल के पैथालॉजी जाकर जब पूरे परिवार की रिपोर्ट ली तो अपने पापा की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव देख चकरा गया। वह हैरान था कि जब पिता की रिपोर्ट निगेटिव थी तो उन्हें कोरोना मरीज बताकर मेडिकल कॉलेज में भर्ती क्यों किया गया।
29 जून की है रिपोर्ट में निगेटिव

जिला अस्पताल से पैथालॉजी विभाग से जो रिपोर्ट जारी हुई उसमें 29 जून अंकित है। उसमें सुनील कुमार गुप्ता की रिपोर्ट पर साफ-साफ नॉट रिएक्टेड अंकित है। इसके अलावा 29 और 30 जून और एक जुलाई को जारी कोरोना मरीजों की सूची में भी सुनील का नाम नहीं है। ऐसे में सुनील गुप्ता को कोरोना मरीज बताकर किस लापरवाही के तहत बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया गया, यह एक बड़ा सवाल है।

यह है प्रोटोकॉल
विदेश या दूसरे प्रांतों से लौटे प्रवासी कामगार उनके संपर्कियों के साथ ही सर्दी, जुकाम, गले में दर्द, सांस फूलने के लक्षण वाले मरीजों को संदिग्ध माना जा रहा है। कोरोना संक्रमित के संपर्कियों भी इसी श्रेणी में रखा जा रहा है। इनकी जांच निजी एवं सरकारी अस्पतालों के पैथोलॉजी में हो रही है। एसिम्प्टोमेटिक(अलाक्षणिक) मरीजों को रेलवे हॉस्पिटल व स्पोर्ट्स कॉलेज में भर्ती किया जा रहा है। जबकि लक्षण वाले (सिम्प्टोमेटिक) गंभीर मरीजों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया जा रहा है। भर्ती करने से पहले यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
–  संदिग्ध मरीज सरकारी या प्राइवेट अस्पताल की फ्लू की ओपीडी में जाकर जांच करा रहे हैं
– जांच की रिपोर्ट एक से दो दिन में मिलती है।
– जांच रिपोर्ट को लैब पहले आईसीएमआर के वेबपोर्टल पर अपलोड करती है। इसके बाद जिले की कोविड टीम को सूचित करती है।
–  जिले में संक्रमित मरीज को सीएमओ और पुलिस की टीम कोविड-19 की टीम सूचित करती है
– संक्रमित मिले मरीज को स्वास्थ्य विभाग की टीम एम्बुलेंस से संबंधित अस्पताल में भर्ती करती है
– कोविड-19 की टीम संपर्कियों की सूची तैयार कर उनकी कोरोना जांच कराती है

यह बेहद गंभीर मामला है। इस मामले को दिखवाया जा रहा है। आमतौर पर मरीज को सूचित करने से पहले दो स्तर पर जांच की जाती है। ऐसे में इसे दिखाया जाएगा कि लापरवाही कहां हुई।
डॉ. श्रीकांत तिवारी, सीएमओ

बीआरडी में भर्ती होने के दौरान कोरोना रिपोर्ट की जांच की जाती है। कई बार मरीज के पास कोरोना रिपोर्ट नहीं होती तो संबंधित सीएमओ से मेल पर मंगा लिया जाता है। अस्पताल से रेफर मरीज में यह रिस्क नहीं होता। अस्पताल से रेफर मरीज के रेफर-स्लिप पर अस्पताल खुद लिख कर भेजता है। इस मामले में ऐसा हुआ होगा। बीआरडी में भर्ती होने पर भी मरीज की कुछ प्राथमिक जांच होती हैं। 17 दिन कोई यूं ही नहीं भर्ती रहा होगा।
डॉ. गणेश कुमार, प्राचार्य

अस्पताल में चूक का सवाल ही नहीं हो सकता। कोरोना संक्रमित की जांच कई स्तर पर होती है। इसके बावजूद सोमवार को मरीज के फाइल की जांच कराई ।
डॉ. एसके श्रीवास्तव, एसआईसी, जिला अस्पताल
 

Input-Hindustan


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Gulam Gaush

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