बिहार में बाढ़: मधुबनी, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर में बांध टूटे, 60 से अधिक गांवों में बाढ़​

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नेपाल के साथ-साथ तराई क्षेत्रों में रुक-रुक कर हो रही बारिश से उफनाईं नदियां उत्तर बिहार के जिलों में मंगलवार को भी तबाही मचाती रहीं। बागमती, लखनदेई, गंडक के  अलावा कई छोटी नदियां भी अलग-अलग जगहों पर लाल निशान से ऊपर पहुंच खतरनाक रुख अख्तियार कर चुकी है। चंपारण, तिरहुत और मिथिलांचल के लगभग पांच दर्जन से अधिक गांव या तो टापू बने हैं, या फिर उनमें पानी तेजी से फैल रहा है। इसबीच बांध और तटबंध टूटने का सिलसिला जारी रहा। मधुबनीके मधवापुर में बलवा अस्पताल के पास धौस नदी का बांध टूट गया। वहीं पूर्वी चंपारण के चिरैया में सिकरहना का बांध टूटने से पानी निचले इलाके में तेजी से फैल रहा है।  मुजफ्फरपुर के पारू में रिंग बांध टूटने से अफरातफरी मच गई। ​

मधुबनी में  एनएच-104 पर कई जगह बाढ़ का पानी चढ़ गया है। इस कारण जिला मुख्यालय से मधवापुर प्रखंड का संपर्क टूट गया है। अब मधवापुर के लोगों को मधुबनी जाने के लिए सीतामढ़ी के चोरौत होते हुए सफर करना पड़ रहा है। मधवापुर प्रखंड में 10 सड़कें बाढ़ में अभी डूबी हैं। पिहवारा महतो टोला और ब्रहमपुरी सहित कुल आधा दर्जन जगहों पर धौस नदी का बांध टूटने अफरातफरी का आलम है। इस जिले के दर्जन भर प्रखंड बाढ़ की चपेट में हैं। ​

दरभंगा के कुशेश्वरस्थान के बिगड़े हालात, 50 हजार लोग बाढ़ के पानी में घिरे ​

दरभंगा के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के दो दर्जन से अधिक गांव पानी से घिर गए हैं। इन गांवों की करीब 50 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। ग्रामीण घर छोड़ कमला बलान तटबंध पर शरण लेने लगे हैं। गौड़ाबौराम प्रखंड के चतरा गांव के 50 घरों में चार से पांच फीट पानी जमा हो गया है। उधर, घनश्यामपुर प्रखंड के डूब क्षेत्रों की हालत भी गंभीर बनी हुई है। हायाघाट में इनमाइत ढाला के पास हायाघाट-अकराहा पथ के ऊपर से बहने लगा है जिससे हायाघाट का इस रास्ते से सड़क संपर्क भंग हो गया है। रास्ते पर दो से ढाई फुट पानी बह रहा है। डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारी लगातार दौरा कर रहे हैं। सभी तटबंधों की निगरानी की जा रही है। ​

मुजफ्फरपुर के छह  प्रखंड बाढ़ की चपेट में, ढाई हजार ग्रामीणों के घर में पानी  
मुजफ्फरपुर में बागमती, लखनदेई व मनुषमारा व गंडक के उफनाने से जिले के छह प्रखंड बाढ़ की चपेट में आ गये हैं। गंडक के जलस्तर में वृद्धि से साहेबगंज, पारू व सरैया प्रखंड में बांध के अंदर बसे डेढ़ दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गये हैं। पारू में सुबह रिंग बांध टूटने से अफरातफरी मच गई। ग्रामीणों ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद टूटे बांध से गांवों में पानी के बहाव को रोका। मगर अभी खतरा बना हुआ है। बागमती औराई, कटरा व गायघाट में तबाही मचा रही है। तीनों प्रखंड में करीब ढाई हजार घरों में पानी घुसा हुआ है। दर्जनभर मुख्य सड़कों पर दो से तीन फीट पानी बह रहा है। लखनदेई व मनुषमारा का पानी भी औराई व कटरा के इलाके में फैल रहा है। बागमती के जलस्तर में हल्की कमी के बावजूद बाढ़ प्रभावित गांवों की स्थिति नहीं सुधरी है। इधर, कांटी प्रखंड के मिठनसराय इलाके में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। खेतों अचानक बढ़े पानी से निचले इलाके में बसे लोग मुजफ्फरपुर-दरभंगा एनएच 57 पर शरण लेने के लिए बांस-बल्ला लगा दिया है। 
सीतामढ़ी में नदियों के जलस्तर में कमी हो रही है। हालांकि चौरौत पुपरी पथ पर बाढ़ का पानी चढ़ गया है। जिससे आवागमन बाधित हो गया है। बागमती कटौझा में खतरे के निशान से  ऊपर है। बाजपट्टी प्रखंड में डूबने से एक बालक कि मौत हो गई है।   ​

सिकरहना का बांध टूटने से चिरैया के निचले इलाके में फैल रहा पानी ​

पूर्वी चंपारण के चिरैया में सिकरहना का बांध टूटने से पानी निचले इलाके में घुसने लगा है। सरसावा गांव के पास सिकरहना नदी का बांध सोमवार देर रात बीस फिट में टूट गया।  बांध के पास बना सड़क पुल भी ध्वस्त हो गया है। इससे सरसावा गांव का संपर्क दूसरे गांवों से कट गया है। नदी का पानी तेजी से सरसावा,सुन्दरपुर खाप,डीह महुआही, आमगच्छी,सरौगड़ व बैद्यनाथपुर गांव की ओर बढ़ रहा है। करीब चार सौ हेक्टेयर में लगी धान की फसल पूरी तरह डूब गयी है। पश्चिम चंपारण के बगहा में एनएच-727 के करीब गंडक का पानी पहुंच गया है। सड़क पर पानी का दबाव बढ़ने से टूटने का खतरा बढ़ गया है।​

Input-Hindustan


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Gulam Gaush

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