भारत में लॉकडाउन पाबंदियों में मामूली छूट के साथ 30 अप्रैल तक बढ़ाया जा सकता है, पीएम-मुख्यमंत्री के साथ बनी आम सहमति

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राष्ट्रव्यापी ‘लॉकडाउन’ कम से कम 30 अप्रैल तक बढ़ने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई एक बैठक में इस पर व्यापक रूप से ‘‘आम सहमति’’ बनी है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘‘जान भी, जहान भी’’ पर जोर देते हुए संकेत दिया कि पाबंदियों में मामूली छूट दी जा सकती है क्योंकि यह लोगों के जीवन के साथ-साथ उनकी आजीविका बचाने के लिए जरूरी है।

सूत्रों के मुताबिक सभी केंद्रीय मंत्रियों को मंत्रालयों में सोमवार से कामकाज बहाल करने और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए लॉकडाउन के बाद की अवधि की मिल-जुलकर योजना तैयार करने को भी कहा गया है।

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है। देशभर में पिछले 24 घंटों में संक्रमण के 1,035 नये मामले सामने आये हैं जबकि 40 लोगों की मौत हुई है। देश में 25 मार्च से 21 दिनों के लिये लॉकडाउन लागू है, जिसकी अवधि मंगलवार तक है। इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि यदि भारत ने कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिये लॉकडाउन और अन्य कदम नहीं उठाये होते तो 15 अप्रैल तक देश में संक्रमण के मामले बढ़ कर 8.2 लाख तक पहुंच जाते।

प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई बातचीत में ज्यादातर मुख्यमंत्रियों ने सुझाव दिया कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को और दो हफ्तों के लिये बढ़ाया जाना चाहिए। एक आधिकारिक बयान में यह कहा गया है। महामारी को फैलने से रोकने के लिये अब तक उठाये गये कदमों के प्रभाव को देखने के लिये आगामी तीन-चार हफ्ते के महत्वूपर्ण होने पर जोर देते हुए मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि ‘‘इस चुनौती का सामना करने के लिये टीम वर्क जरूरी है।’’

बयान में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने इस बात का भी जिक्र किया कि सरकार का ध्येय वाक्य पहले ‘‘जान है तो जहान है’’ था, लेकिन अब ‘‘जान भी, जहान भी’’ है। सूत्रों के मुताबिक सरकार महामारी की रोकथाम के लिये कोविड-19 के हॉटस्पॉट (कोरोना वायरस संक्रमण से प्रभावित क्षेत्रों) पर और लॉकडाउन हट जाने पर अर्थव्यस्था को रफ्तार देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने लॉकडाउन बढ़ाने के फैसले की सीधे तौर पर कोई घोषणा नहीं की, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बैठक के बाद ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन बढ़ाने का सही फैसला किया है। आज भारत की स्थिति कई विकसित देशों से बेहतर है क्योंकि हमने जल्द लॉकडाउन शुरू किया। अगर इसे अभी हटा दिया गया तो सारे फायदे खत्म हो जाएंगे। इसलिए इसे बढ़ाना जरूरी है।’’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने भी कहा कि प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन 30 अप्रैल तक बढ़ाने के बारे में जिक्र किया। इस बारे में भी संकेत मिले हैं कि लॉकडाउन बढ़ाये जाने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये कुछ छूट भी दी जाएगी।

सूत्रों ने बताया कि कई प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें वायरस के प्रसार से अछूते इलाकों में अपेक्षाकृत कम पाबंदियां लगाना भी शामिल है। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि लॉकडाउन के दूसरे चरण के लिये दिशानिर्देशों की अगले कुछ दिनों में घोषणा की जाएगी। वहीं, बातचीत के बाद येदियुरप्पा ने यहां तक कहा कि लॉकडाउन की विस्तारित अवधि मौजूदा 21 दिनों के लॉकडाउन से अलग होगी।

आधिकारिक बयान में आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों पर भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी का हवाला दिया गया। बयान में कहा गया कि मोदी ने इस संकट को भारत को आत्मनिर्भर बनाने और राष्ट्र को आर्थिक शक्ति में तब्दील करने का एक अवसर बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और टेली-मेडिसीन के जरिये रोगियों तक पहुंचने के बारे में भी बात की। इसमें कहा गया है, ‘‘लॉकडाउन से बाहर निकलने की योजना के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन और दो हफ्तों के लिये बढ़ाने पर राज्यों के बीच आम सहमति नजर आ रही है।’’

प्रधानमंत्री ने यह बैठक महामारी से उपजी स्थिति पर चर्चा करने के लिये और लॉकडाउन बढ़ाने के विषय पर मुख्यमंत्रियों के साथ विचार-विमर्श करने के लिये बुलाई थी। इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्य में लॉकडाउन 30 अप्रैल तक बढ़ाने की घोषणा की और कहा कि कुछ इलाकों में पाबंदियों में ढील दी जाएगी।

महाराष्ट्र में कोविड-19 के सर्वाधिक मामले दर्ज किये गये हैं। राज्य में संक्रमण के अब तक 1600 मामले सामने आये हैं और कम से कम 110 लोगों की मौत हो चुकी है। पंजाब और ओडिशा लॉकडाउन 14 अप्रैल से आगे बढ़ाने की पहले ही घोषणा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा के दौरान यह टिप्पणी की कि केंद्र और राज्यों की संयुक्त कोशिशों से कोविड-19 के प्रभाव को कम करने में अवश्य ही मदद मिली है लेकिन चूंकि स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए निरंतर सतर्कता बरतना ही सर्वोपरि होगा।

मोदी ने स्पष्ट रूप से यह भी भरोसा दिलाया कि भारत के पास आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त आपूर्ति है और कहा कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों के लिये व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण तथा आवश्यक उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये कदम उठाये जा रहे हैं। उन्होंने कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों को भी सख्त संदेश दिया।

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने बैठक के बाद कहा कि कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र से वित्तीय पैकेज की मांग की। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि सभी कर्मचारियों के लिये स्वास्थ्य कवर की जरूरत है। उन्होंने दिहाड़ी मजदूरों को आर्थिक सहायता देने की भी मांग की।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मोदी से राज्यों को अपनी सीमाओं के अंदर आर्थिक गतिविधियां करने देने की इजाजत मांगी। मोदी के साथ बैठक में कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी थे, जिनमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी भी थे। बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मनोहर लाल, तेलंगाना के के. चंद्रशेखर राव और बिहार के नीतीश कुमार भी शामिल हुए।


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