मुज़फ्फरपुर: स्कूल में दो शिक्षक तैनात, छात्र-छात्राओं की नामांकन की संख्या बारह

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सकरा,मुज़फ्फरपुर:प्रखंड का ऐसा सरकारी स्कूल जहॉ दो शिक्षक पर बारह बच्चो के जिंदगी को सवारने की जिम्मेदारी है। भला क्यो न हो सरकार इस विधालय पर प्रत्येक वर्ष पच्चीस लाख रूपये से भी अधिक रूपये खर्च करती है लेकिन गुणवत्ता की बात करे तो विधालय मे केवल पॉच बच्चे ही आते है। वे बच्चे भी उस पोषक क्षेत्र के नही है जिसमे यह विधालय स्थापित है। आखिर वजह क्या है? विधालय मे गॉव के लोग अपने बच्चो को भेजना क्यो नही चाहते। अखर गॉव के लोगो को जागरूक किया जाता तो विधालय मे सरकार के मानक के अनुरूप दो शिक्षक पर सत्तर बच्चो को पढाने की जिम्मेदारी होती। लेकिन सरकार व उनके तंञो की ओर से कोई दवाब नही होने के कारण नामांकन व उपस्थिति भगवान भरोसे चल रहा है। शिक्षक अपनी ड्यूटी पुरा कर वापस घर लौट आते है लेकिन अभिभावकों मे जागरूकता नही रही। बुनियादी जरूरतों मे रोटी कपड़ा, मकान का तो ख्याल है लेकिन शिक्षा की ओर से मानो मूहँ मोर लिया हो। कहानी सकरा प्रखंड के विशुनपुर बघनगरी पंचायत के वार्ड संख्या चार स्थित रा.प्रा.वि.जगदीशपुर बनवारी स्कूल है। इस स्कूल में मात्र 12 बच्चें पंजीकृत हैं। विद्यालय में एक शिक्षक और एक शिक्षामित्र की तैनाती है। साथ ही 12 बच्चे का पंजीकृत होने के बावजूद भी 5 बच्चे स्कूल मे पढ़ने आते हैं। वही नामांकन की बात करें तो साल दर साल यह गिरता ही जा रहा है। 2016 मे 31, 2017 मे 27,2018 मे 21, 2019 मे 17 और इस सत्र मे नामांकन गिरकर सिर्फ 12 रह गया है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का यह आलम है कि पांच वर्षों से विद्यायल में बच्चों की संख्या 35 से ऊपर नहीं बढ़ सकी। वार्ड सदस्य पति रौशन कुमार एवं ग्रामीण रुपेश कुमार,मुन्ना कुमार, संतोष कुमार आदि का कहना है कि स्कूल के अध्यापक कभी बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए गांव में नहीं आते हैं, न ही अभिभावकों को विद्यालयों में अपना बच्चा भेजने के लिए प्रेरित करते हैं। दोनों अध्यापक स्कूल में बैठे रहते हैं। आरोप है कि स्कूल में बच्चों की संख्या न बढ़ने के लिए शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। अध्यापकों पर कम पंजीकरण होने पर कोई कार्रवाई तक नहीं की गई। 3 छात्र कक्षा एक, एक छात्र कक्षा दो, तीन छात्र कक्षा तीन और चार छात्र कक्षा चार व एक छात्रा कक्षा पाँच मे है । विद्यालय में पूर्व में बच्चों की संख्या काफी अच्छी होती थी। लेकिन अब हालात बदतर हैं। विद्यालय के शिक्षा मित्र प्रमिता देवी का कहना है कि बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

1986 मे मिली थी विधालय की स्वीकृति
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गॉव मे एक विधालय अपना हो जहॉ गॉव के बच्चे को बुनियादी शिक्षा मिले यह सपना गॉव के सूर्य देव मिश्रा ने देखी। उन्होने दो कठ्ठा जमीन विधालय के नाम पर 1986 मे दान दे दी। वर्ष 2003 मे भवन का निर्माण कराया गया। गॉव के बच्चे पठने आते थे लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मे कमी के कारण लोगो का मोह विधालय से भंग हो गया। धीरे धीरे बच्चे विधालय मे आना बंद कर दिए। विधालय के शिक्षक किसी तरह पॉच बच्चो को लाकर पठाते है ताकि उनका वेतन बंद न हो। बताते चले की करीब पंद्रह सौ की आबादी वाले गॉव मे 464 मतदाता है जिसमे पुरूषों की संख्या 249 तथा महिलाओं की संख्या 215 है।ऑगनबाडी सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार गॉव मे 0 से 6 वर्ष के बच्चो की संख्या 50 है जिसमे 27 लडका तथा 23 लडकी है वही 6 से 14 वर्ष के बच्चो की संख्या 35 है जिसमे 18 लडका तथा 17 लडकी है। बावजूद इसके विधालय मे बच्चो का नामांकन नही है। अधिकाश बच्चे गॉव से बाहर शहर मे रहकर पठाई करते है।

विशुनपुर बघनगरी राजकीय प्राथमिक विद्यालय मे प्रार्थना करते छात्र। इन पांच बच्चों के सहारे ही चल रही है कक्षा
विशुनपुर बघनगरी राजकीय प्राथमिक विद्यालय मे प्रार्थना करते        छात्र। इन पांच बच्चों के सहारे ही चल रही है कक्षा

एक बच्चे को पढ़ाने पर सरकारी खर्चे करीब पच्चास हजार रूपये

एक बच्चो को पहले से पॉचवा तक की पठाई कराने मे सरकारी खर्च पच्चास हजार रूपया से ज्यादा आता है।
इसमे अध्यापको के मासिक वेतन के अलावे स्टेशनरी, पोषाहार, बिजली व पानी सहित अन्य खर्च अलग से है। बावजूद इसके बच्चो की संख्या मे लगातार कमी चिंता का बिषय है।

शहर व सड़क के नजदीक वाले स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक :
सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों का टोटा व अध्यापकों की भरमार की स्थिति गॉव के नजदीक व सड़क किनारे वाले विद्यालयों में ज्यादा है।सकरा प्रखंड मे राष्ट्रीय उच्च पथ 28 के किनारे के गॉव मे स्थित विधालयो मे बच्चो की संख्या भले ही कम हो लेकिन शिक्षकों की संख्या अधिक रहती है सड़क किनारे वाले विद्यालयों में अध्यापकों को आने जाने में सुविधा रहती है। इसलिए वे जोड़तोड़ यहां जमे हुए हैं।

नहीं जुड़ा एक भी विद्यार्थी :

इस बार सरकारी विद्यालयों के अध्यापकों का नामांकन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन क्षेत्र में अधिकांश स्कूलों में यह पूरा नहीं हो पाया। क्योंकि ज्यादातर शिक्षकों ने इसके लिए प्रयास ही नहीं किया। कई विद्यालय तो ऐसे हैं, जहां एक भी नया विद्यार्थी नहीं आया।

कहते है प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का कहना है कि विद्यालयो के शिक्षको को टारगेट दिया गया है। नये सञ के शुरूआत मे बच्चो की संख्या मे बठोञी होगी।

कहते है प्रखंड विकास पदाधिकारी

प्रखंड विकास पदाधिकारी आनंद मोहन का कहना है कि विधालय मे पोषक क्षेत्र के बच्चो का नामांकन अतिआवश्यक है। बावजूद इसके दो बच्चों पर पॉच बच्चे की उपस्थिति गंभीर मामला है। इस संदर्भ मे वरिय महकमा से मार्ग दर्शन माँगा जाएगा।


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Vikash Mishra

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