आर.सी. कॉलेज सकरा सकरा धरोहर है, धरोहर को बचाना हमसब का सर्वप्रथम कर्तव्य है – रौशन कुमार

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भाकपा माले के छात्र संगठन आइसा ने पार्टी अभियान के तहत आर.सी. कॉलेज के पुस्तकालय को लेकर लिखा पत्र।

पुस्तकालय बचाओ – पुस्तकालय बनाओ आंदोलन

पुस्तक–पुस्तकालय बचाना है, शिक्षित समाज बनाना है!

आज जबकि बिहार में प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च स्तर तक की सरकारी शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह से जर्जर व ध्वस्त हो चुकी है, एक बार फिर से पुस्तकालय आंदोलन चलाने की जरूरत आन पड़ी है। गरीब घरों के छात्र-युवाओं का पठन-पाठन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। संसाधनों व जगह के अभाव में उनकी पढ़ाई पूरी तरह बाधित है। अतः पुस्तकालय संस्कृति को हर स्तर पर बढ़ावा देकर हम इस कमी को काफी हद तक दूर करने की दिशा मेें आगे बढ़ सकते हैं।

सत्तर के दशक में बिहार में 540 सार्वजनिक पुस्तकालय, 4000 से ज्यादा ग्रामीण एवं शिक्षण संस्थानों में अनगिनत पुस्तकालय थे, जो राज्य व केन्द्र सरकारों की घोर उपेक्षा के कारण या तो समाप्त हो गये हैं या फिर समाप्ति के कगार पर हैं। बिहार में अब मात्र 51 सार्वजनिक व 1000 ग्रामीण पुस्तकालय बच रहे हैं जहां बुनियादी संसाधनों, किताबों, लाइब्रेरियन, परिचारी का घोर अभाव है। यहां तक कि पुस्तकालयों के पास अखबार खरीदने का भी पैसा नहीं है। वे जर्जर स्थिति में हैं। 2013 के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के पुस्तकालयों को कोई सरकारी अनुदान नहीं मिला और न हीं लाइब्रेरियन की कोई बहाली हुई।

तो वही आइसा के छात्र नेता रौशन कुमार ने कहा आर.सी. कॉलेज सकरा में लंबे समय से पुस्तकालय बुरी तरह से प्रभावित, गरीब घरों के बच्चें का पठन-पाठन और संसाधनों व बंद जगह के अभाव में उनकी पढ़ाई पूरी तरह बाधित है। पुस्तकालय के पुस्तकें जो कॉलेज व यूनिवर्सिटी के संबंधित कर्मियों की घोर उपेक्षा के कारण या तो समाप्त हो गये हैं या फिर समाप्ति के कगार पर हैं। बुनियादी संसाधनों, किताबों, लाइब्रेरियन, परिचारी का घोर अभाव है। यहां तक कि पुस्तकालय में हिन्दी व इंग्लिश अखबार, मैगजीन तक नहीं मंगवा रही है। पुस्तकालय के बच्चे कुछ पुस्तकें देखरेख के कारण वे जर्जर स्थिति में जारहे हैं। यथाशीघ्र लाइब्रेरियन की बहाली हो।

आइसा के छात्र नेता मुजम्मिल मांग करते हुए कहा की बंद पड़े और जर्जर पुस्तकालय को पुनर्जीवित करें, पुस्तकालय के लिए एक बड़े बिल्डिंग को आवंटित करें, जिनमें हर विषय की किताबें, वाई-फाई, कम्प्यूटर, टेलिविजन, इंटरनेट, सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की पत्रिकाएं, सभी अखबार, बिजली, कुर्सी टेबुल, और शांतिपूर्ण माहौल में छात्र-युवाओं के लिए पढ़ने की व्यवस्था हो, लाइब्रेरियन वर्षो से खाली पड़े व नये पदों पर शीघ्र बहाली करो तथा पुस्तकालयों में काम करनेवाले कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दे, लंबे समय से बंद रखने वाले कर्मियों को चिन्हित कर अविलंब उचित कार्रवाई की जाए अन्यथा छात्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।


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